भारतीय सभ्यता विश्व की सबसे पुरानी जीवित सभ्यता है| अन्य समकालीन सभ्यताएं, या बाद की सभ्यताएं अर्थात मेसोपोटामिया की सभ्यता, नील नदी सभ्यता और चीनी सभ्यता, न के बराबर हो गए हैं जबकि भारतीय सभ्यता कई आघातों एवं विदेशी आक्रमणकारियों के हमलों के बादजूद आज भी संपन्न है| इसकी निरंतरता का कारण इसकी सोचने एवं रहने की प्रणाली है| इसका एक अलग दर्शन है जो हमें यह बताता है की जीवन की पूर्ति परम आनंद को प्राप्त करने एवं शाश्वत सुख को अनुभव करना है| सोच की यह प्रणालियाँ हमारे संतो के हजारों सालों के भारी प्रयास तथा उस ज्ञान को अपने शिष्यों को देकर विकसित की गयीं हैं| इस ज्ञान को वेदांत दर्शन के रूप में जाना जाता है| यह हमारे शास्त्रों, उपनिषदों, दर्शन शास्त्रों, पुराणों, रामायण, महाभारत, श्रीमद भगवद गीता में संहिताबद्ध किया गया है| यह शास्त्र संस्कृत में हैं, जो आजकल कोई अधिक प्रयोग में आने वाली भाषा नहीं है और कई बार इस दर्शन को समझना मुश्किल हो जाता है| कई विद्वानों ने इन् शास्त्रों की व्याख्या अपने तरीको से की हैं, लेकिन फिर भी यह ठीक से समझने और इन शास्त्रों में प्रतिपादित सिद्धांतों को आत्मसात करने के लिए मुश्किल है|

हाल ही में यह महसूस किया गया है की हमारे समाज में जीवन के प्रति मूल्य पश्चिमी प्रभाव के कारण कम हो रहे हैं, जो कि जीवन के प्रति भौतिकवादी द्रष्टिकोण से अतिभारित है| यह भी महसूस किया जा रहा है की हमारे युवाओं को इन् ग्रंथों के संपर्क में आने का उचित अवसर नहीं मिल रहा है| आज हमें जो अधिकतम मिल रहा है वह टीवी या धार्मिक सभाओं में कुछ प्रवचन के माध्यम से है, लेकिन वह हमारे प्राचीन ज्ञान का समुचित चित्र उपलब्ध करवाने के लियें पर्याप्त नहीं है|

हमारी संस्था, अध्यात्म ज्ञान एवं चिन्तन संस्था, एक आसान और बोधगम्य ढंग से इस प्राचीन ज्ञान का प्रचार करने के लिए एक प्रयास कर रही है| हम लोगों को हमारे शास्त्रों के सिद्धांतों से अवगत करवाते हैं तथा उन्हें जागरूक करते हैं| जीवन का उद्देश्य क्या है? इस आश्चर्यपूर्ण ब्रह्मांड का केंद्र क्या है ? सच्चा सुख क्या है? हम इसे कैसे प्राप्त कर सकते हैं? इन और कई अन्य तरह के सवालों के जवाब हमें जिस प्रज्ञता में मिलते हैं, उसे हम ब्रह्मज्ञान कहते हैं|

हम सभी जानते हैं की मनुष्य केवल रोटी से जिंदा नहीं रह सकता| मनुष्य का मन जिज्ञासु है और वह सब कुछ जाने की इच्छा रखता है| हमारा प्रयास इस प्यास के शमन में मदद करने के लिए है. भारतीय दर्शन ऐसा करने का सबसे अच्छा तरीका है.